September 19, 2026

KHABAR BHATAPARA

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डिजिटल लेन-देन का वित्तीय भार सीधे व्यापारियों पर डालना अनुचित : अमरजीत सिंह सलूजा

UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क को लेकर व्यापारियों में चिंता

व्यापारियों ने सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क 0% रखने की मांग की

भाटापारा/khabar-bhatapara.in:- UPI एवं डिजिटल लेन-देन पर व्यापारियों से प्रस्तावित MDR (Merchant Discount Rate) शुल्क को लेकर व्यापारिक जगत में चिंता और नाराजगी सामने आ रही है। भाटापारा के व्यापारियों एवं छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं, बल्कि डिजिटल लेन-देन की लागत का अतिरिक्त वित्तीय भार व्यापारियों पर डालने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।

व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार अनुचित

छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह सलूजा ने कहा कि वर्तमान समय में खुदरा एवं थोक व्यापार सीमित लाभ मार्जिन पर संचालित हो रहा है। देश में डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में व्यापारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत तक शुल्क अथवा ₹300 तक की कैपिंग जैसे प्रावधान लागू किए जाते हैं, तो इसका सीधा वित्तीय भार व्यापारियों पर पड़ेगा। एक ओर डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उसके संचालन की लागत व्यापारिक वर्ग पर डालना उचित नहीं है।

चेम्बर की प्रमुख मांगें

छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने केंद्र सरकार एवं वित्त मंत्रालय से मांग की है कि—

  1. व्यापारियों के लिए सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क पूर्णतः 0% रखा जाए।
  2. डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास एवं संचालन की लागत सरकार एवं संबंधित वित्तीय संस्थाओं द्वारा वहन की जाए तथा व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार न डाला जाए।

“व्यापारी डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं”

चेम्बर पदाधिकारी श्रीचंद छाबड़िया ने स्पष्ट किया कि व्यापारियों का विरोध UPI अथवा डिजिटल भुगतान व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। UPI ने भुगतान प्रक्रिया को तेज, सरल, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लागू करने से पहले उसके व्यापारियों, विशेषकर छोटे दुकानदारों एवं कम मार्जिन वाले कारोबारियों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।

भाटापारा के व्यापारियों में चिंता और नाराजगी

चैंबर ऑफ कॉमर्स भाटापारा के अध्यक्ष गुरमुख गंगवानी ने कहा कि 15 अक्टूबर से UPI भुगतान पर कारोबारियों से शुल्क लिए जाने की चर्चाओं के बीच व्यापारियों में चिंता एवं नाराजगी है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त खर्च जुड़ता है, तो इसका प्रभाव सीधे व्यापारियों के कारोबार पर पड़ सकता है। आगे चलकर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों पर भी पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने छोटे व्यापारियों को किसी भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाने की आवश्यकता बताई।

छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त बोझ से बचाना जरूरी

लक्ष्मीनारायण सोनी ने कहा कि UPI ने भुगतान प्रक्रिया को तेज, सरल एवं पारदर्शी बनाया है। व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के पक्ष में हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों, लघु व्यापारियों और कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले व्यापारियों को किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सरकार एवं संबंधित संस्थाओं को व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शुल्क संबंधी किसी भी व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए।

केंद्रीय नेतृत्व एवं NPCI को सौंपा जाएगा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि इस विषय को लेकर जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व एवं NPCI (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) को विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।

चेम्बर ने दोहराया कि व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के पक्ष में हैं, लेकिन डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की लागत का पूरा भार व्यापारियों पर डालना उचित नहीं होगा। व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए UPI पर MDR शुल्क को शून्य (0%) रखने की मांग की गई है।